Sunday, November 15, 2015

असली माँ

असली माँ

नाटक ‘विक्रम का न्याय' का मंचन किया जा रहा था। दो स्त्रियों में विवाद था कि बच्चे की असली माँ कौन है और बच्चा किसे सौपा जाए। महान न्यायाधीश विक्रमादित्य ने अपने सिपाहियों को आदेश दिया कि बच्चे को दो टुकड़ों में बांटकर दोनो स्त्रियों को एक एक हिस्सा सौंप दिया जाए।

इसके पहले कि सिपाही आगे बढ़ते,दर्शकों मे से एक तीसरी स्त्री दौडती हुई मंच पर चढ गई और बच्चे को छीनकर नाट्‌यगृह से बाहर चली गई।

नाटक मे भी अपने बच्चे का अहित न देख सकने वाली वह तीसरी स्त्री बच्चे की असली माँ थी।   

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