Sunday, November 15, 2015

तस्वीर

तस्वीर

आज तडके नंदू को गुमटी पर पहुँचने में थोड़ी देर हो गई थी. कल की थकान के कारण सुबह देर से नींद खुली थी. माई  ने भी जगाया नहीं था. वैसे भी कल मालिक ने दुगने पैसे दिए थे. 

दुकान की भट्टी से धुँआ उठता दिखाई दे रहा था. मालिक ने ही शायद  लकडियाँ सुलगा कर अगरबत्ती भी जला  दी थी. मोहनभाई ने अपनी सायकल से दूध की टंकी उतारकर भगोनी में दूध उंढेल दिया था. लकड़ी की बेंच पर माहेश्वरी सर बैठे रोज की तरह अखबार पलट रहे थे. सुबह की सैर के बाद पहली चाय वे उसकी गुमटी पर ही पीते थे.  
' वाह रे नंदू आज तो तू हीरो बना अखबार में छाया हुआ है. ' उसे देखते ही अखबार का पन्ना नंदू के सामने लहराते हुए कहा.

'कहाँ सर ?' नंदू उत्सुकता से अखबार का पेज माहेश्वरी जी के हाथों से लपकते हुए देखने लगा. माहेश्वरी जी ने चित्र पर अँगुली रख दी.

सचमुच कल के कार्यक्रम का चित्र अखबार में छपा हुआ था जिसमे जिले के कलेक्टर साहब और एसपी साहब के साथ मंत्री जी बैठे दिखाई दे रहे थे, नंदू भी अपनी चाय की केतली लिए चाय का गिलास पकडे नजर आ रहा था. नंदू के जीवन में शायद यह बड़ा महत्वपूर्ण दिन आया था.  बड़ों बड़ों के फोटो अखबार में छपना मुश्किल होता है लेकिन उसका फोटो इतनी कम उम्र में छप गया था. खुशी की चमक उसके चहरे पर साफ़-साफ़ दिखाई दे रही थी. 

कल जब गुमटी से लगे तहसील कार्यालय में नए भवन के निर्माण के लिए शिलान्यास कार्यक्रम हुआ था, तब उसे पता नहीं था कि दौड-दौडकर सबको चाय पिलाने का फल उसे तोहफे में इस तरह मिलेगा. सबको पता था कि कार्यक्रम में बड़े-बड़े लोग आने वाले हैं और चाय तो नंदू की गुमटी से ही लगनी है. माई ने भी दीपावली पर मिली अपने मालिक के बेटे की पुरानी जींस पेंट और टी शर्ट उसे पहनाया था .

भले ही नंदू की उम्र अभी ग्यारह बरस ही थी लेकिन बम धमाके में बापू की मौत के बाद बड़ी हुई अपनी जिम्मेदारी का अहसास उसे था . बहुत उत्साह से नन्दू पूरे दिन और शाम को कार्यक्रम खत्म होने के बाद बहुत देर तक काम में जुटा रहा था. उसके मालिक ने तहसील कार्यालय के फर्नीचर आदि को फिर से व्यवस्थित करने का काम भी ले लिया था , इस वजह से देर रात को ही वह  घर पहुँच पाया था.

आज के अखबार ने कल की पूरी थकान उतार दी थी . दिन भर नंदू बेहद खुश रहा. मालिक भी इतराता रहा. हरेक ग्राहक को प्रशंसा भाव से अखबार का फोटो दिखाता .रात को घर लौटते समय नंदू  अखबार का पन्ना घर लेकर आ गया. माई को बताया तो माई ने उसे गले लगा लिया.           
                                                                                                         
अगली सुबह जब वह गुमटी पहुँचा तो वही दृश्य उपस्थित था वहाँ. रोज की तरह माहेश्वरी सर अखबार खोले बैठे चाय की प्रतीक्षा कर रहे  थे. मालिक थोड़ा परेशान सा दिखाई दे रहा था. ' अरे कहीं ऐसा भी होता है भला, कहाँ जाएँगे ये बेचारे.! कैसे अपना पेट भरेंगे.चाय ही तो पिला रहे हैं कोई जेब तो नहीं काट रहे ,भीख माँगने के लिए झूठ तो नहीं बोल रहे.' माहेश्वरी सर झल्ला रहे थे.

'नहीं ,मै तो कोई रिस्क नहीं ले सकता .यहाँ तहसील आफिस में बड़े-बड़े अफसर -मंत्री आते हैं. रोज का काम पडता है ,नंदू को हटाकर कोई बड़ा लड़का काम पर रख लूंगा. सरकार से दुश्मनी नहीं लूंगा. मालिक ऊंची आवाज में बोल रहा था.

नंदू को कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मामला क्या है. कौनसी गलती हो गई है उससे कि मालिक उसे काम से हटाना चाहता है. वह सोच ही रहा था कि मालिक के शब्द उसके कानों में पड़े –' नंदू तू कल से काम पर मत आना. थोड़ा बड़ा हो जाए फिर आना.'
नंदू हथप्रभ रह गया. पढना तो वह जानता नहीं था अन्यथा अखबार की  रिपोर्ट पढकर शायद कुछ समझ पाता, जिनमें कलेक्टर ,एसपी और मंत्री जी  की उपस्थिति में बाल श्रम क़ानून की उपेक्षा होने की शिकायत छपी थी.  

मालिक के शब्द उसके कानों में बम धमाके से गूँज रहे थे . हाथ में पकडे कल के  अखबार का पन्ना हाथ से छूटकर  बैंच पर जा गिरा .  उसकी आँखे भर आईं थीं  , वह फफक पड़ा. आंसुओं के कारण बैच पर पड़े हुए अखबार की तस्वीर उसकी नज़रों से ओझल हुई जा रही थी जिसमे वह मंत्री जी को चाय  का गिलास थमाते हुए मुस्करा रहा था.  न जाने क्या हुआ कि अचानक उसकी कोहनी माहेश्वरी सर के गिलास से टकरा गई, चाय छलक कर अखबार पर वहीं गिरी जहाँ तस्वीर छपी थी.



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