जन्मदिन
आस्था आश्रम के सबसे होनहार बच्चे शिवकुमार ने जैसे ही बाँस की सींकों
से बने जहाज का मॉडल विशाल के हाथों में दिया अनाथालय का प्रांगण तालियों की गड़गड़ाहट
से गूंज उठा। आश्रम के बच्चों की क्राफ्ट काम्पीटिशन
मे शिवकुमार ने यह जहाज बनाकर पहला पुरस्कार प्राप्त किया था।
शहर के प्रमुख ज्वेलर और समाजसेवी सेठ धनपति के बेटे विशाल का आज जन्मदिन
था । बेटे का जन्मदिन वे लीक से हटकर अंलग तरह से सेलिब्रेट करना चाहते थे। सुबह से
ही पूरा परिवार तालाब किनारे स्थित इस रमणीय अनाथालय पहुँचा था। जैसे ही उनकी बड़ी कार
आकर रुकी, प्रबंधक ने फूलमालाओं से सबका स्वागत किया। एक बालिका ने विशाल को तिलक
लगाकर गुलाब की कली भेंट की। पूरे दिन उत्सव सी गहमा-गहमी रही।
सेठ धनपति द्वारा प्रायोजित यह दिन आश्रम के बच्चों के लिए अब कोई नई
बात नहीं रह गया था। महीने दो महीने में ऐसा अवसर अक्सर आ जाया करता था। आज भी आश्रम
में विशाल के परिवार की उपस्थिति में खेल-कूद
हुए,मैजिक शो हुआ,नृत्य एवं गीतों की प्रस्तुतियाँ दीं गर्ईं। आश्रम के बच्चों को विशाल
ने टी-शर्ट और महंगी टॉफियां वितरित कीं ,हाथ मिलाया और बातचीत
की। आश्रम के सबसे होनहार बच्चे शिवकुमार ने
संस्था की ओर से विशाल को जहाज के मॉडल का उपहार भेंट किया।
अपने बेटे को अनुभूतियों और संवेदनाओं का अनूठा उपहार देकर सेठ धनपति बेहद
संतुष्ट थे तो अलग हटकर जन्म दिन को एंजॉय
करने की खुशी का भाव विशाल के चेहरे पर स्पष्ट दिखाई दे रहा था।
कार्यक्रम की समाप्ति के बाद जब कार नियॉन रोशनी में जगमगाती सड़क पर दौड़
रही थी उधर आश्रम में शिवकुमार शयन पूर्व की प्रार्थना के लिए आँखें बंद कर ईश्वर को याद कर रहा था- कल दसवां
जन्म दिन है। शक्ति देना कि और मेहनत कर सकूँ, सफलता देना प्रभु !
अगली सुबह शिवकुमार अपने साथियों
को बता रहा था-कल रात सपनें में उसने विशाल की हवेली में अपना जन्मदिन मनाया है।
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