Saturday, November 14, 2015

करतब

करतब

बहुत दिनों बाद मैं वह तमाशा देख रहा था ।  एक छोटी लडकी छोटे-छोटे हाथों में लंबा बाँस थामे संतुलन बनाकर ऊँचे रस्से पर चल रही थी।   उसका साथी बच्चा नीचे ढपली बजा रहा था । ग्रामीण बच्चों के इस प्रर्दशन को महानगर के लोग बडे कुतुहल से देख रहे थे ।  अंचम्भित भी हो रहे थे - ' देखो छोटी सी बच्ची कितना जोखिम भरा करतब दिखा रही है । '

कुछ देर बाद लडकी ने रुककर अपनी आँखों पर कपडे की पट्‌टी बाँध ली तथा और अधिक मुश्किल करतब दिखाना शुरु कर दिया । अब वह अधिक सावधानी पूर्वक रस्से पर कदम आगे बढा रही थी ।

करतब जब अपने सर्वोच्च रोमाँच पर था, ढपली बजाने वाले बच्चे ने ईनाम की चाह में लोगों के सामने ढपली फैला दी ।

मैने देखा भीड छटनें लगी ।  कुछ युवकों के मुँह से निकला- 'बेवकूफ बना  रही है----पट्‌टी में से सब दिख रहा है लडकी को।'

ढपली मे दो रुपए का सिक्का डालकर जैसे ही आगे बढा, मैने देखा वही युवक पान गुमटी से गुटखा पाउच खरीद रहे थे।



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