Tuesday, May 5, 2026

विचारों की भूमध्य रेखा

विचारों की भूमध्य रेखा

प्रभुदयालजी का समूचा सेवाकाल क्रोध से भरा हुआ निकला था। किसी भी बात या विचार को वे सहजता से स्वीकार नहीं कर पाते थे। तुरंत प्रतिक्रिया देते, बहस करते और बड़ी मुश्किल से संतुष्ट हो पाते थे। इस प्रक्रिया में उनका व्यक्तित्व और व्यवहार भी बुरी तरह प्रभावित होता गया था। ऐसा लगता जैसे गुस्सा और बैचेनी उनका एक स्थायी भाव हो, उनकी भावभंगिमा से ऐसा ही सामान्यतौर से महसूस भी होता था। 

जब तक शरीर और मन शक्ति से भरा था उनका जीवन जैसे तैसे कट ही गया लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद यही स्वभाव उनकी बीमारी का बड़ा कारण बनता गया। 


दिनभर टीवी पर खबरिया चैनलों की उत्तेजक बहसों को देखते हुए परेशान होते रहते। भिन्न विचारधाराओं वाले प्रवक्ताओं के तर्कों और कुतर्कों से वे बहुत प्रभावित और उद्वेलित हो जाते। यह देखकर वे बहुत दुखी होते कि कोई दाएं की बात करता है तो कोई बाएं की।  इसका सीधा असर उनके स्वास्थ्य पर पड़ने लगा। गहरे अवसाद और निराशा से उनका जीवन रसहीन होता गया। 


अंततः उन्होंने टीवी पर उत्तेजक खबरिया बहसों को देखना बंद कर दिया। समय काटने को उन्होंने यूट्यूब पर विश्व यात्रियों के वीडियो देखना शुरू करके दुनिया को जानने समझने का नया विकल्प तलाश लिया। लेकिन उनका स्वभाव कैसे बदल सकता था, लोगों के विचारों से सहमत होने में अब भी बड़ी कठिनाई आती थी, उनके भीतर संताप बना ही रहता था। 


एक ट्रेवलर के यूट्यूब वीडियो में जब प्रभुदयालजी ने भूमध्य रेखा पर युगांडा के एक पर्यटन स्थल पर एक दिलचस्प प्रदर्शन देखा तो हतप्रभ रह गए। युगांडा में भूमध्य रेखा पर एक प्रसिद्ध टूरिस्टिक प्वाइंट है, जिसे "इक्वेटर लाइन" कहा जाता है।  इस स्थान पर क्रमशः भूमध्य रेखा के दाहिने तरफ एक पात्र, एक पात्र ठीक भूमध्य रेखा पर तथा एक अन्य पात्र बांई ओर रखा है। इन पात्रों में जब पानी के बीच फूल को रखा जाता है तो वह भूमध्य रेखा के पात्र में स्थिर रहता है लेकिन अन्य दोनों पात्रों में उसके घूमने की दिशा बिल्कुल विपरीत हो जाती है। 


यह प्रयोग पृथ्वी की घूर्णन गति के प्रभाव से कोरिओलिस पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध में दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर कार्य करता है। जबकि भूमध्य रेखा पर, कॉरिओलिस बल शून्य होता है। इसी वजह से उत्तरी गोलार्ध में, फूल दाईं ओर घूमने लगता है, जबकि दक्षिणी गोलार्ध में, वह बाईं ओर घूमने लगता है।


प्रभुदयालजी को अनायास इस वीडियो को देखते हुए जीवन में पुनः आनंद की वापसी का रास्ता दिखाई दे गया। मन ही मन सोचने लगे, जब समूची पृथ्वी भूमध्य रेखा के दोनों ओर अलग अलग तरह से व्यवहार करती है, अलग अलग दिशाओं में हवाएं बहती हैं, अलग अलग बल काम करते हैं तब भी पृथ्वी संतुलित है, उसका चक्र सहजता से कायम है तो फिर उनके लिए क्या मुश्किल हो सकती है। उन्होंने अपने मस्तिष्क में पहुंचने वाले भिन्न विचारों के विपरीत बलों के प्रभाव से व्यथित होने की बजाए भूमध्यरेखीय स्थिति को बनाए रखने का अभ्यास शुरू कर दिया। उनके जीवन में प्रसन्नता के फूल फिर से खिलने लगे। 


ब्रजेश कानूनगो



सूरजमुखी की रीढ़

सूरजमुखी की रीढ़

रामनाथजी अपने पोते के साथ रोज की तरह सुबह की सैर को निकले हुए थे। प्रदेश के बड़े उद्योगपति रहे थे वे। बेटे को जमा जमाया कारोबार सौंपकर इधर राजनीति और समाजसेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय हो गए थे।

उनकी कोठी के खूबसूरत बगीचे में दुनियाभर के सुंदर फूलों के पौधे उन्होंने बड़े शौक से लगाए हुए थे।  एक खास फुलवारी में सैकड़ों सूरजमुखी के पौधों पर उतने ही प्यारे फूलों की बहार आई हुई थी।

आठवीं कक्षा के छात्र अपने पोते को उन्होंने सूरजमुखी फूलों की ओर इशारा करते हुए कहा, देखो राहुल इन सब फूलों का चेहरा खिलने पर सूरज की ओर ही होता जाता है। 

हां दादाजी मुझे यह पता है और इसके पीछे का विज्ञान भी मैं जानता हूं। राहुल ने फुलवारी के फूलों पर अपना हाथ घुमाते हुआ कहा।

अरे वाह! तुम तो बड़े होशियार हो, जरा बताओ ऐसा क्यों होता है? रामनाथजी ने उत्सुकता से मुस्कुराते हुए कहा।

दादाजी, सूरजमुखी के तने में ऑक्सिन नाम का एक प्लांट हार्मोन पाया जाता है। यह हार्मोन सूर्य के प्रकाश के प्रति बहुत संवेदनशील होता है। जब सूरज की रोशनी तने के एक हिस्से पर पड़ती है, तो ऑक्सिन हार्मोन तने के छाया वाले हिस्से में जाकर जमा हो जाता है। हार्मोन की अधिकता के कारण छाया वाला हिस्सा तेजी से बढ़ता है, जिससे तना सूर्य की दिशा में झुक जाता है।  सूरजमुखी को पता होता है कि सूरज कब और कहाँ से उगने वाला है। दिन के समय फूल पूर्व से पश्चिम की ओर सूरज का पीछा करता रहता है।  रात में यह अपनी जैविक घड़ी के अनुसार धीरे-धीरे वापस पूर्व की ओर मुड़ जाता है ताकि अगली सुबह की पहली किरण का स्वागत कर सके।

जब सूरजमुखी का फूल पूरी तरह खिल जाता है और परिपक्व हो जाता है, तो उसका तना सख्त हो जाता है और वह स्थायी रूप से पूर्व दिशा की ओर मुख करके स्थिर हो जाता है। पोते के मुख से सूरजमुखी का विज्ञान सुनकर रामनाथ जी भौचक्क रह गए। उनके मस्तिष्क की कोई जैविक घड़ी सक्रिय हो गई। उनके भीतर कुछ उद्वेलित होने लगा। 

वातावरण में सूर्य की सत्ता और धूप का प्रभाव बढ़ रहा था, रामनाथजी का हाथ संयोग से अपनी रीढ़ की हड्डी को सहलाने लगा। कहीं कुछ चुभ रहा था, जो भी राजनीतिक दल सत्ता में होता था वे सदैव उसके समर्थक बने रहते थे।


ब्रजेश कानूनगो