सूरजमुखी की रीढ़
रामनाथजी अपने पोते के साथ रोज की तरह सुबह की सैर को निकले हुए थे। प्रदेश के बड़े उद्योगपति रहे थे वे। बेटे को जमा जमाया कारोबार सौंपकर इधर राजनीति और समाजसेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय हो गए थे।
उनकी कोठी के खूबसूरत बगीचे में दुनियाभर के सुंदर फूलों के पौधे उन्होंने बड़े शौक से लगाए हुए थे। एक खास फुलवारी में सैकड़ों सूरजमुखी के पौधों पर उतने ही प्यारे फूलों की बहार आई हुई थी।
आठवीं कक्षा के छात्र अपने पोते को उन्होंने सूरजमुखी फूलों की ओर इशारा करते हुए कहा, देखो राहुल इन सब फूलों का चेहरा खिलने पर सूरज की ओर ही होता जाता है।
हां दादाजी मुझे यह पता है और इसके पीछे का विज्ञान भी मैं जानता हूं। राहुल ने फुलवारी के फूलों पर अपना हाथ घुमाते हुआ कहा।
अरे वाह! तुम तो बड़े होशियार हो, जरा बताओ ऐसा क्यों होता है? रामनाथजी ने उत्सुकता से मुस्कुराते हुए कहा।
दादाजी, सूरजमुखी के तने में ऑक्सिन नाम का एक प्लांट हार्मोन पाया जाता है। यह हार्मोन सूर्य के प्रकाश के प्रति बहुत संवेदनशील होता है। जब सूरज की रोशनी तने के एक हिस्से पर पड़ती है, तो ऑक्सिन हार्मोन तने के छाया वाले हिस्से में जाकर जमा हो जाता है। हार्मोन की अधिकता के कारण छाया वाला हिस्सा तेजी से बढ़ता है, जिससे तना सूर्य की दिशा में झुक जाता है। सूरजमुखी को पता होता है कि सूरज कब और कहाँ से उगने वाला है। दिन के समय फूल पूर्व से पश्चिम की ओर सूरज का पीछा करता रहता है। रात में यह अपनी जैविक घड़ी के अनुसार धीरे-धीरे वापस पूर्व की ओर मुड़ जाता है ताकि अगली सुबह की पहली किरण का स्वागत कर सके।
जब सूरजमुखी का फूल पूरी तरह खिल जाता है और परिपक्व हो जाता है, तो उसका तना सख्त हो जाता है और वह स्थायी रूप से पूर्व दिशा की ओर मुख करके स्थिर हो जाता है। पोते के मुख से सूरजमुखी का विज्ञान सुनकर रामनाथ जी भौचक्क रह गए। उनके मस्तिष्क की कोई जैविक घड़ी सक्रिय हो गई। उनके भीतर कुछ उद्वेलित होने लगा।
वातावरण में सूर्य की सत्ता और धूप का प्रभाव बढ़ रहा था, रामनाथजी का हाथ संयोग से अपनी रीढ़ की हड्डी को सहलाने लगा। कहीं कुछ चुभ रहा था, जो भी राजनीतिक दल सत्ता में होता था वे सदैव उसके समर्थक बने रहते थे।
ब्रजेश कानूनगो
No comments:
Post a Comment