पसंद - नापसंद
सरकार ने पुराने नोट बंद कर दिए थे। पुराने नोट बैंकों से बदलवाने का आज आखिरी दिन था। लंबी कतार में लगे लोग अपनी बारी की प्रतीक्षा करते यों ही बतिया रहे थे।
हसन - मैं अपने बच्चे का नाम 'राहुल' कभी नहीं रखूँगा।
कमल - राहुल सांस्कृतायन् तो बहुत विद्वान थे। यदि ऐसा है तो मैं भी अपने बेटे का नाम 'नरेंद्र' नहीं रखूंगा।
कमल- ये भी कोई बात हुई। विवेकानंद का नाम भी तो 'नरेंद्र' था।
तभी बैंक में अनाउंस हुआ- 'टोकन नम्बर 2016...'
कमल कतार से निकलकर चेनल गेट से भीतर चला गया।
हसन का टोकन नंबर 2017 था। वह अपनी बारी की प्रतीक्षा करने लगा।
टोकन नंबरों में पसंद नापसंद का कोई प्रश्न ही खड़ा नहीं हो सकता था।
ब्रजेश कानूनगो
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