स्टीम इंजिन
हरिभाऊ के जीवन का बड़ा हिस्सा महानगर के रेलवे स्टेशन की आपाधापी, कोलाहल और प्लेटफार्म पर दौड़ लगाते ही गुजरा।
जिस तरह समय के साथ उनकी उम्र,शरीर और सेहत में बदलाव आए महानगरीय स्टेशन और उसकी प्रकृति भी दिन प्रतिदिन बदलती गई।
जब हरिभाऊ युवक थे, मांसपेशियां भी मजबूत थीं। सिर पर दो अटैचियाँ और बगल में बैग लटकाए एक सूटकेस को थामकर बीसियों सीढियां चढ़ना उतरना बहुत आसान था। समय के साथ शरीर शिथिल हो गया। उम्र भी अब बोझ उठाने की नहीं रही। नए युवा कुलियों ने काम संभाल लिया।
जो पुराना काला स्टीम इंजिन स्टेशन पर धरोहर के रूप में गौरव बढ़ा रहा है हरिभाऊ ने उसे पटरियों पर दौड़ते देखा था। बाद में डीजल और इलेक्ट्रिक इंजनों के दौर में भी मजबूत रेलगाड़ियों के डिब्बों से यात्रियों के भारी भरकम सामान को लादकर तांगों,रिक्शों तक पहुंचाया।
उनकी उम्र और अनुभव और विनम्र स्वभाव ने स्टेशन के कुली समुदाय में मुखिया और मार्गदर्शक के रूप में ही स्वीकारा गया था। रेलवे स्टाफ भी हरिभाऊ को पर्याप्त सम्मान देता।
ज्यादा समय वे कुलियों के विश्रामालय में बैठकर कुलियों की समस्याओं को सुनते और रेलवे के संबंधितों तक बात पहुंचाते। कुलियों के विश्रामालय में मच्छरों की समस्या थी, लेटने बैठने के उचित साधन नहीं थे,स्वास्थ्य संबंधी देखभाल की समस्याओं पर भी प्रशासन तक उन्होंने कुलियों की बातें पहुंचाई थीं। यही कारण था कि वे सर्वप्रिय अघोषित कुली नेता थे। सबका आदर पाते थे।
जब स्टेशन से नई आधुनिक वंदे भारत रेल के शुभारंभ का अवसर आया तो कुछ लोगों का सुझाव आया कि नई रेलगाड़ी का औपचारिक शुभारंभ हरिभाऊ के करकमलों द्वारा होना चाहिए। वे ही नई रेल को हरी झंडी दिखाएं। स्थानीय रेलवे स्टाफ और रेलवे सलाहकार मंडल की भी यही राय रही। उनके नाम का प्रस्ताव भी उच्चाधिकारियों तक पहुंचा दिया गया।
शुभारंभ के दिन आधुनिक नई रेलगाड़ी को हार फूलों से सजाया गया था। हरिभाऊ भी उत्साह से प्लेटफार्म पर इंजन के सामने अपने साथियों सहित खड़े रहे। इस अवसर के लिए उन्होंने नया गणवेश भी सिलवाया था।
तभी रेलवे के एक अधिकारी कुलियों के समूह के पास आए और कुछ समझाने लगे। थोड़ी देर में कुलियों का समूह पीछे हट गया। हालांकि हरिभाऊ को वहीं रुकने का आग्रह किया गया। वे वहीं रुक गए। नेताओं की भीड़ बढ़ने लगी।
शुभारंभ के ठीक मुहूर्त समय पर मंत्री जी,उनके सहायक, रेलवे अधिकारी, स्थानीय नेतागण उपस्थित हुए। पूजन आदि किया गया। स्थानीय स्टेशन मास्टर ने अतिथियों का स्वागत किया। असिस्टेंट स्टेशन मास्टर ने एक पुष्प गुच्छ और एक अभिनंदन पत्र हरिभाऊ को प्रदान कर उनका सम्मान किया।
इधर हरिभाऊ सम्मान पत्र थामे देखते रह गए उधर तालियों की गड़गड़ाहट के बीच मंत्रीजी ने एक्सप्रेस रेलगाड़ी को हरी झंडी दिखाई तो रेलगाड़ी धीरे धीरे प्लेटफार्म छोड़ने लगी।
शुभारंभ समारोह के बाद हरिभाऊ ने कुली विश्रामालय की बेंच पर अपना सम्मानपत्र रखा और स्टेशन प्रांगण में सजे स्टीम इंजिन को आत्मीयता से निहारने लगे।
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ब्रजेश कानूनगो