Wednesday, June 21, 2023

बुजुर्ग जीवन का योगासन

बुजुर्ग जीवन का योगासन

योगाचार्य जी की समस्या यह थी कि अब वे बूढ़े हो गए थे। पत्नी कोई पच्चीस बरस पहले ही उनका साथ छोड़कर चली गई थीं। एक मात्र बेटी विवाह पश्चात दामाद संग जर्मनी जा बसी। 

कोई कितनी ही कोशिश कर ले वह बुढ़ापे को आने से रोक नहीं सकता। वे योगाचार्य थे इसलिए उन्होंने अपने शरीर को असमय के क्षय से काफी बचा रखा था। धन और तन दोनों को वे पूंजी मानते थे और उसे अंत तक बचाए रखना चाहते थे लेकिन पिचासी वर्ष की आयु में आते आते स्वास्थ्य दगा देने लगा। योग आदि भी छूट गया। बदलते समय और समाज से कटते चले गए। किसी से बातचीत तक करने को तरस जाते। बोलने, बात करने की उत्कंठा उन्हे बैचेन किए रहती थी।

धन की पूंजी शरीर के इलाज पर खर्च की जा सकती है लेकिन मन को कैसे ठीक करें। रेडियो, टीवी मनुष्य का विकल्प नहीं हो सकते। टिफिन सेंटर से एक बालक उनका भोजन लेकर रोज आता था। उसी से थोड़ा अपने पास बैठने को कहते। हाल चाल जानते, कहते। 

दिनेश एक ऑटो ड्राइवर का बेटा था और अपनी पढ़ाई के साथ साथ टिफिन पहुंचाने का काम भी किया करता था। उसी ने जब उन्हें बताया कि परीक्षाओं के कारण वह अब बैठकर बातचीत नहीं कर पाएगा तो वे निराश हो गए। 

दूसरे दिन दिनेश से कोई एक दो वर्ष छोटी लड़की टिफिन लेकर आई। कहने लगी, भैया अब परीक्षा की तैयारी में लगे हैं इसलिए वही उनके पास आएगी और पूरे दिन उनके साथ रहेगी, बातें भी करेगी। कागज और कपड़े की थैलियां बनाने का रोज का अपना काम वहीं बैठकर किया करेगी। 

और इसके साथ ही उनके बुजुर्ग जीवन के स्वर्णकाल का शुभारंभ हो गया। संवाद, अपनत्व और भावनाओं के पर्यावरण में जीवन की सूखी बगिया में दिनेश और रत्ना ने खुशियों के फूल खिला दिए।  मन की बीमारी के इस इलाज पर उन्होंने धन की पूंजी न्यौछावर कर दी। दिनेश तहसीलदार बन गया और रत्ना क्राफ्ट सेंटर की मालिक होकर विदेशों तक में सॉफ्ट ट्वॉयज निर्यात करने लगी।

बुजुर्ग योगाचार्य का यह नया योगासन सचमुच बड़ा फलदाई और अनुकरणीय रहा। वे तन और मन से निरंतर स्वस्थ होते चले गए।

ब्रजेश कानूनगो

Saturday, February 18, 2023

माखन मिश्री का आभासी आनंद

माखन मिश्री का आभासी आनंद

वह विदेशी पर्यटक एक व्लॉगर भी है और यूट्यूब के लिए मथुरा में विडियो बना रहा है। हिंदी सीखकर हिंदुस्तान को समझने के लिए हिंदुस्तान आया है। वह हिंदी बोलता है तो हर व्यक्ति के मन में खुशी और सम्मान की लहर दौड़ जाती है। मुस्कुराहटें बिखर जाती हैं।

ब्लागर बाजार में चहलकदमी करते हुए दर्शकों को श्रीकृष्ण और कंस की कहानी सुनाता हुआ कृष्ण की प्रिय वस्तु 'माखन मिश्री' की बात भी करता है। उसका स्वाद लेना चाहता है  किंतु उसे पता नहीं है कि यह क्या चीज होती है। हर दुकान पर वह इसके बारे में पूछता जाता है। एक जगह वह इसे मांगता है तो उसे मिश्री पकड़ा दी जाती है। दुकानवाला मक्खन के लिए आगे की किसी दुकान का पता बता देता है। व्लॉगर वहां पहुंचकर माखन मांगता है। यह दूध की दुकान है। माखन मांगने पर दूधवाला आधा किलो गर्म दूध पॉलिथीन की थैली में पैक कर दे देता है। पर्यटक इसे मक्खन ही समझता है।वीडियो देखते हुए हमें बहुत दुख और अफसोस होता है। कैसे व्लॉगर की मदद करें?

होटल पहुंचकर विदेशी पर्यटक किसी तरह मिनरल वाटर की खाली बोतल में तथाकथित माखन (दूध) भरता है। मिश्री के कुछ टुकड़े उसमें घोलने की कोशिश करता है। हम दुखी होते जा रहे हैं। विदेशी व्लॉगर असीम उत्साह और खुशी से भरा है। उसके चेहरे पर संतुष्टि का भाव है। बोतल से मुंह लगाकर सारा दूध मिश्री एक सांस में गटक जाता है। भगवान श्रीकृष्ण की मनपसंद वस्तु का सेवन करने का सुख सहज उसके चेहरे पर देखा जा सकता है।

विडियो देखते हुए हमे न जाने क्यों आत्मग्लानि सी हो रही है। काश कोई उसे वहां बता पाता कि 'माखन मिश्री' क्या होती है। मन को दिलासा देते हैं, भगवान तो बस भाव को ग्रहण करते हैं। हो सकता है उस व्लॉगर को दूध मिश्री में भी वही स्वाद और आनंद मिला होगा जो सचमुच श्रीकृष्ण को मिलता था।

विडियो खत्म हो गया है। विदेशी पर्यटक महंगे होटल के बिस्तर में चादर तान कर सो गया है। इधर टीवी बंद करने के बाद भी हमारी आंखों में नींद नहीं उतर पा रही। भीतर कुछ भीग रहा है।

ब्रजेश कानूनगो